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संता-बंता Hindi Jokes

एक पादरी, वकील और इंजीनियर को विद्रोह के कारण मौत की सजा मिली। जब सजा देने का वक़्त आया तो अपराधियों को आखिरी ख्वाहिश की प्रथा बताई तो उन्हें गर्दन ऊपर और नीचे रखने के विकल्प मिले।

पादरी ने ऊपर देखना स्वीकारा ताकि भगवान को देख सके और जैसे ही बटन दबाया गया तो आरी, गर्दन से सिर्फ दो इंच ऊपर रुक गई। अधिकारियों ने इसे ईश्वर की मर्जी समझ के उसे छोड़ दिया।

वकील ने भी ऊपर देखा और जब आरी रुकी तो वह बोला कानूनन एक व्यक्ति को दो बार सजा नहीं दी जा सकती और वह भी छूट गया।

इंजीनियर ने भी ऊपर ही देखने का फैंसला किया। जब बटन दबाया जा रहा था तो वो चिल्लाया, "एक मिनट रुको, अगर आप उस हरे और लाल तार को आपस में बदल देंगे तो काम हो जायेगा।"

बस काम तमाम हो गया।
एक बार संता शाम को घर आया, टी. वी. चालू किया और सोफे पर बैठते ही जीतो से बोला, "इससे पहले की शुरू हो जाये जल्दी से मेरे लिए चाय लेकर आओ।"

जीतो को कुछ अजीब लगा पर वो चाय बना कर ले आई।

चाय पीते-पीते संता दोबारा जीतो से बोला, "इससे पहले शुरू हो जाये, मेरे लिए कुछ खाने के लिए भी लेकर आओ।"

जीतो को थोड़ा गुस्सा आया पर उसने संता को कुछ खाने के लिए भी दे दिया और वापस अपने काम में लग गयी।

थोड़ी देर बाद संता दोबारा बोला, "इससे पहले की शुरू हो जाये, यह बर्तन उठाओ यहाँ से।"

जीतो का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया और संता पर चिल्लाते हुए बोली, "मैं तुम्हारी कोई नौकरानी नहीं हूँ, जो मुझ पर इस तरह अपना हुकुम चला रहे हो। जब से आओ कुछ न कुछ हुकुम किये जा रहे हो जैसे यहाँ कोई तुम्हारा गुलाम है।"

संता उठा और गहरी सांस लेते हुए बोला, "लो शुरू हो गया।"
संता ने बंता को थप्पड़ मार दिया।
बंता ने तुरंत कड़े शब्दों में इसकी निंदा कर दी।

संता ने बंता को फिर थप्पड़ मारा।
बंता ने और कड़े शब्दों में इसकी निंदा कर दी।

संता ने बंता को फिर से थप्पड़ मारा।
बंता ने और कड़े शब्दों में इसकी निंदा की और इन हरकतों से बाज आने की चेतावनी जारी कर दिया।

संता ने बंता को फिर थप्पड़ मारा।
बंता ने इसे निंदनीय कृत्य निरूपित किया और कहा कि यह हमला संता के हताशा का परिचायक है।

संता ने बंता को फिर से थप्पड़ मारा।
अबकी बार बंता ने अपने चारों ओर सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश जारी कर दिया, और दो टूक शब्दों में संता को बता दिया कि यह हमला कायराना हरकत है।

संता ने बंता को फिर से थप्पड़ मारा।
अबकी बार बंता ने फौरन मीटिंग बुला कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश जारी कर दिया और संता को उचित समय पर कार्यवाही की चेतावनी दी।

संता ने बंता को फिर से थप्पड़ मारा।
अबकी बार बंता अपने सुरक्षा कर्मियों को संता के घर के चारों तरफ तैनात की हमले के लिए तैयार रहने का निर्देश देता है।

संता माहौल को भांप कर बंता को शांति वार्ता के लिए नियंत्रण देता है।

अगले दिन बंता संता की बीवी के लिए सूट का कपड़ा, शाल तथा बच्चों के लिए मिठाई लेकर शांतिवार्ता के लिए पहुंच जाता है, वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न होती है।

बंता सीना फुलाकर वापस आ जाता है।

अगले दिन बंता को फिर थप्पड़ पड़ता है और मेरे पास घटना का वर्णन करने के लिए शब्द खत्म हो गये, लेकिन सिलसिला जारी है।
एक बार एक आदमी सड़क किनारे बैठ कर बीड़ी पी रहा था, तभी वहां संता आता है और उस आदमी से कहता है, "भाई, नशा करना छोड़ दो और मेरे साथ चलो मै तुम्हे दिखाता हूँ ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

उस आदमी ने बीड़ी फेंक दी और संता के पीछे चल दिया!

थोड़ी और आगे जाने के बाद संता को और उस आदमी को एक पठान मिलता है जो की पेड़ के नीचे बैठ कर चरस पी रहा होता है, उसको देख संता उससे भी कहता है,"भाई, नशा करना बुरी बात है, मेरे साथ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

पठान भी चरस फेंकता है और संता के पीछे-पीछे चल पड़ता है!

थोड़ी और आगे जाने के बाद संता को बंता दिखाई देता है, जो की शराब पी रहा होता है, बंता को देख संता उससे भी कहता है, " देखो भाई नशा करना बुरी बात है, मेरे साथ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

संता की बात सुन बंता अपना पैग मेज पर रख देता है और संता को पीटने लगता है!

यह सारा तमाशा देख पठान को गुस्सा आ जाता तो वह बंता से कहता, "तुम क्यों इस नेक इंसान को पीट रहे यह तो तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा है!"

पठान की बात सुन बंता जवाब देता है, "भला-वला गया भाड़ में, इस साले ने कल भांग पीकर मुझे भी ऐसे ही 3 घंटे तक सारे शहर में पैदल घुमाया था!"
संता बंता और उनका एक दोस्त बीयर बार में बीयर पीने गए!

जब वह पीने लगे तो संता बोला लगता है बाहर बारिश हो रही है और हमारे पास छतरी भी नहीं है, तीनों में ये बात चल पड़ी की छतरी लाने के लिए कौन जाएगा गरमागरम बहस के बाद तय हुआ कि बंता छतरी लेने के लिये घर जाये!

बंता ने गुस्से में कहा मेरे जाने पर तुम मेरी सारी बीयर पी जाओगे उन्होंने उसे विश्वास दिलाया कि वे दोनों उसके हिस्से की बीयर नहीं पीयेंगे, उसके हिस्से की ज्यों की त्यों रखी रहेगी तब कहीं बंता छतरी लेने चला गया!

रात गहराने लगी पर बंता वापिस लौटकर नहीं आया संता अपने दोस्त को बोला क्यों न बंता के हिस्से की बीयर भी पी ही ली जाये अब तो वो आने से रहा!

दूसरा बोला मैं भी यही सोच रहा था आओ पीते हैं!

तभी बार के एक कोने की छोटी सी खिड़की से तेज आवाज आई अगर पीओगे तो मैं छतरी लेने नहीं जाऊंगा!
संता एक बार शिकार करने चला गया और साथ में अपनी पत्नि जीतो और सास को भी ले गया!

एक शाम को जंगल में बहुत गहरा अँधेरा था सब कुछ शांत था और जीतो अपनी माँ को इधर उधर ढूंढने लगी, जब उसे अपनी माँ कहीं भी नहीं नजर आयी तो उसने संता को बताया कि माँ पता नहीं कहाँ है!

तब संता ने अपनी राइफल उठाई और बाहर निकल गया संता ने थोड़ी सी शराब भी पी रखी थी वो जहाँ ठहरे थे पहले उन्होंने उसके चारों ओर ढूंढा पर उन्हें संता की सास कहीं नहीं मिली फिर वे दोनों जंगल में काफी दूर आ गए!

तभी जीतो की नजर सामने अपनी माँ पर पड़ी उसकी माँ के बिल्कुल सामने शेर था!

वह घबराते हुए संता से कहने लगी अब हमें क्या करना चाहिए?

संता ने कहा कुछ नहीं! शेर खुद ही इस झंझट में फंसा है, अब इसे खुद ही इस झंझट से बाहर निकलना है!
बंता मछलियाँ पकड़ने में काफी माहिर था और बड़ी बड़ी मछलियाँ पकड़ने के लिए मशहूर था, एक दिन वो बड़ी सी मछली पकड़कर टोकरी में लेकर घर की तरफ आ रहा था तभी मत्स्य अधिकारी ने उसे रोका और पूछा क्या तुम्हारे पास मछली पकड़ने का लाइसेंस है!

बंता ने जवाब दिया: लाइसेंस? कैसा लाइसेंस? लाइसेंस की तो कोई जरुरत ही नहीं है ये तो मेरी पालतू मछली है!

पालतू मछली? मत्स्य अधिकारी ने पूछा!

बंता ने जवाब दिया: जी हाँ सर 'पालतू' हर रात को मैं इसे इस झील में डाल देता हूँ और थोड़ी देर के बाद मैं एक सीटी बजाता हूँ और ये कूदकर झील के किनारे पर आ जाती हैं और टोकरी में डालकर घर ले जाता हूँ!

ये तो तुम मेरा सरेआम बेवकूफ बना रहे हो मछली ऐसा कर ही नहीं सकती!

बंता ने अधिकारी से कहा: आप ये चाहते हैं कि मैं आपको ये सब करके दिखाऊँ!

मत्स्य अधिकारी ने उत्सुकता से कहा: बिल्कुल जरुर देखना चाहूँगा!

बंता ने मछली को पानी में डुबो दिया और वहीँ खड़ा हो गया थोड़ी देर वहीँ रुकने के बाद मत्स्य अधिकारी ने बंता से कहा: फिर?

बंता: फिर क्या?

अधिकारी ने पूछा: तो तुम अपनी मछली को वापिस नहीं बुला रहे हो!

बंता ने कहा: मछली?... कौन सी मछली?
एक बार संता शिकार करने चला गया उसने जाते ही एक कबूतर को मार दिया वह कबूतर जाकर एक खेत में गिरा, जब वह बाड़ा पार करके उस कबूतर के पास पहुंचा तभी एक किसान वहां आया और संता को पूछने लगा कि वह उसकी प्रोपर्टी में क्या कर रहा है?

संता ने कबूतर को दिखाते हुए कहा कि मैंने इस कबूतर को मारा और ये मर कर यहाँ गिर गया मैं इसे लेने आया हूँ!

किसान ने कहा ये कबूतर मेरा है क्योंकि ये मेरे खेत में पड़ा है!

संता ने कहा क्या तुम जानते हो तुम किससे बात कर रहे हो?

किसान ने जवाब दिया नहीं मैं नहीं जानता और मुझे इससे भी कुछ नहीं लेना है कि तुम कौन हो!

संता ने कहा मैं लुधिआना का एक बहुत मशहूर वकील हूँ, और अगर तुमने मुझे इस कबूतर को ले जाने से रोका तो मैं तुम पर ऐसा मुकदमा चलाऊंगा कि तुम्हें तुम्हारी जमीन जायदाद से बेदखल कर दूंगा और तुम्हें एक पल में रास्ते का भिखारी बना दूंगा!

किसान ने कहा हमारे भटिंडा मैं तो बस एक ही कानून चलता है लात मारने वाला!

संता ने कहा मैंने तो कभी इसके बारे में नहीं सुना!

किसान ने कहा मैं तुम्हें तीन लातें मारता हूँ अगर तुम वापिस उठकर तीन लातें मुझे मार पाओगे तो तुम इस कबूतर को ले जाना!

संता ने कहा ये ठीक है उसने उस किसान को देखा कि वह तो बिल्कुल कमजोर सा है तो इसकी लातों से उसे क्या फर्क पड़ने वाला ये सोचकर उसने कहा ठीक है मारो!

किसान ने बड़ी बेरहमी से संता को पहली लात टांगों के बीच में मारी जिससे संता मुहं के बल झुक गया!

किसान ने दूसरी लात संता के मुहं पर मारी जिसके पड़ते ही वह जमीन पर गिर गया!

तीसरी लात किसान ने संता की पसलियों पर मारी बड़ी देर बाद संता उठा और जब वह लात मारने के लायक हुआ तो संता ने कहा अब मेरी बारी है!

किसान ने कहा, चलो छोड़ो यार! ये कबूतर तुम ही रखो!
संता और बंता कोई बिजनेस शुरू करने कि सोच रहे थे बहुत चर्चा के बाद उन्होंने ये फैसला किया कि होटल का बिजनेस शुरू करते है!

उन्होंने होटल चलाने के लिए पहले एक अच्छी सी जगह देखी और फिर स्टाफ और अन्य सामग्री जो होटल के लिए आवश्यक होती है सब का प्रबंध किया फिर होटल का उदघाटन किया और काम शुरू कर दिया वो ग्राहकों का इन्तजार करने लगे एक दिन दो दिन... लगातार ऐसे ही 7 दिन बीत गए पर उनके पास कोई ग्राहक नहीं आया... जानते है क्यों?

क्योंकि होटल के प्रवेशद्वार पर लिखा था 'आगंतुकों का' आना मना है (विजिटर्स नॉट अलाउड)!

होटल का बिजनेस असफल होने के बाद उन्होंने फिर नया बिजनेस शुरू किया ऑटो गैराज का!

उन्होंने गैराज को बहुत बढ़िया सजाया, गाड़ियों के स्पेयर पार्ट और दूसरे यंत्र एकत्रित कर, उन्होंने जल्दी ही गैराज का काम शुरू कर दिया वो चाहते थे कि उनके गैराज के बाहर बहुत सी गाड़ियाँ आये पर लगातार 7 दिन तक उनके गैराज में एक भी गाड़ी नहीं आयी... जानते है क्यों?

क्योंकि उनका गैराज बिल्डिंग की पहली मंजिल पर था!
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