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गुदगुदी Hindi Jokes

सरकारी बैंक में इंटरव्यू चल रहा था। ब्रांच मैनेजर पहले सवाल का जवाब सुन कर ही 200 से ज्यादा लोगों को रिजेक्ट कर चुके थे। अब अंतिम 3 बचे थे।

पहले उमीदवार को बुलाया गया।

मैनेजर: तुम्हारा नाम क्या है?
उमीदवार 1: सुरेश सिंह
मैनेजर: तुम जा सकते हो।

दूसरा दावेदार आया।

मैनेजर: तुम्हारा नाम क्या है?
उमीदवार 2: मेरा नाम गिरीश चंद्र जोशी है।
मैनेजर: दफा हो जाओ यहाँ से।

अब तीसरे उमीदवार की बारी आयी।
मैनेजर: तुम्हारा नाम क्या है?
उमीदवार नंबर 3 कुछ नहीं बोला।

मैनेजर: मैंने पूछा तुम्हारा नाम क्या है?
उमीदवार फिर चुप।

मैनेजर: अबे अपना नाम बता?
उमीदवार फिर भी चुप।

मैनेजर: श्रीमान कृपया अपना नाम बताइये?
उमीदवार: मुझे नहीं पता, काउंटर नंबर 4 पे पूछिये।

मैनेजर: बहुत बढ़िया। तुम इस बैंक के लिए एकदम सही हो... तुम्हारी नौकरी पक्की। कल से आ जाओ।
सुबह सारे काम निपटा कर गई कामवाली को शाम को उसका पति लेकर आया।

कामवाली का पति: मैडम, कल से मेरी घरवाली आपके यहाँ काम करने नहीं आयेगी।

मैडम: पगार कम पड़ रही है क्या? तीसरा महीना पूरा होने के बाद पगार बढ़ा दूंगी।

कामवाली का पति: बहन, बात पगार की नहीं है, हमारी तकलीफ दूसरी है।

मैडम: क्या तकलीफ है बताओ, चुटकी बजाते ठीक कर दूंगी।

कामवाली का पति: मैडम, तकलीफ चुटकी बजाते दूर हो जाए ऐसी नहीं है, आप तो दूसरी कामवाली ढूंढ लो।

मैडम: तकलीफ बताये बगै़र मैं तुम्हें काम नहीं छोड़ने दूंगी, बोलो क्या तकलीफ़ है?

कामवाली का पति: आप पूरा दिन अपने पति को डांटती फटकारती रहती हो, यह देखकर ये भी यह सब सीखने लग गई है। मेरे में साहब जितनी सहनशक्ति नहीं है जिससे इस बेचारी को रोज़ाना मार खाना पड़ती है, मुझे मेरे घर में और अशांति नहीं चाहिए। मैडम की जीभ तालू से चिपक गई, सिरपर हाथ रखकर सोफे पर अभीतक बैठी है।
एक पैसेंजर ट्रेन इंदौर से भीलवाडा की तरफ रवाना होनी थी। रात दस बजे सभी डिब्बे खचाखच भर गए. हमारे एडमिन जी भी चढ़ तो गए, पर जब उन्हें बैठने तक की जगह नहीं मिली तो उन्हें एक उपाय सूझा।

उन्होंने "सांप, सांप, सांप" चिल्लाना शुरू कर दिया। यात्री लोग डर के मारे सामान सहित उतर कर दूसरे डिब्बों में चले गए। वे ठाठ से ऊपर वाली सीट पर बिस्तर लगा कर लेट गए। दिन भर के थके थे सो जल्दी ही नींद भी आ गई।

सवेरा हुआ, "चाय, चाय" की आवाज पर वे उठे चाय ली और चाय वाले से पूछा कि कौन सा स्टेशन आया है?

तो चाय वाले ने बताया, "इंदौर है।"

फिर पूछा, `इंदौर से तो रात को चले थे?`

चाय वाला बोला, `इस डिब्बे में सांप निकल आया था, इसलिए इस डिब्बे को यहीं काट दिया था।`
एक बार एक शिक्षक कक्षा में बच्चों को मनोविज्ञान का प्रयोग करके दिखा रहा होता है! प्रयोग की शुरुआत मैं वह एक चूहा लेता है और उसके एक तरफ केक और दूसरी तरफ एक चुहिया रख देता है, और बच्चों से कहता है;

शिक्षक: बच्चों अब ध्यान से देखिएगा की यह चूहा केक की तरफ जाता है या चुहिया की तरफ?

जैसे ही शिक्षक की बात ख़त्म होती है चूहा केक की तरफ जाता है और केक खा लेता है, उसके बाद शिक्षक फिर वही प्रयोग दोहराता है और केक की जगह रोटी रख देता है!

इस बार फिर चूहा चुहिया की तरफ ना जा कर रोटी की तरफ जाता है और रोटी खाने लगता है, यह देख शिक्षक बच्चों से कहता है;

शिक्षक: देखा बच्चों दोनों बार चूहा खाने की तरफ गया, तो इसका यह अभिप्राय है कि भूख ही सबसे बड़ी अभिप्रेरणा होती है!

शिक्षक की बात सुन कक्षा में बैठा हुआ एक बच्चा उठा और शिक्षक से बोला;

बच्चा: मास्टर जी आप ने दो बार खाने की चीजें बदली और दोनों ही बार चूहा खाने तरफ गया, एक बार ज़रा चुहिया भी बदल कर देख लेते!
एक बार एक पुजारी और वकील मर गए और दोनों स्वर्ग के दरवाजे पर खड़े हो गए, यमदूत ने उन दोनों को अन्दर भेजा और दोनों अन्दर चले गए।

अन्दर एक और यमदूत खड़ा था जो उन दोनों को उनके कक्ष तक ले गया।

पहले पुजारी को उसके कक्ष तक छोड़ा जो एक छोटा सा कमरा था जिसमें एक बिस्तर और छोटा सा डैस्क लगा था पुजारी ने यमदूत को धन्यवाद कहा और यमदूत वकील को लेकर उसके कक्ष कि तरफ चल पड़ा।

जब वो दूसरे कक्ष के पास पहुँचा तो ये एक बहुत बड़ा कमरा था जिसमे डबल बेड, एक बड़ी अलमारी, किताबों से भरा हुआ रैक और एक सुन्दर औरत और भी बाकि सभी प्रकार की सुविधाओं से वो कमरा भरा हुआ था।

वकील ने कहा कि मुझे यह समझ नहीं आया कि आपने पुजारी को एक छोटा सा कमरा दिया और मुझे सारी सुविधाओं से भरा ये इतना बड़ा कमरा?

इस पर यमदूत बोला,"साहब हमारे पास यहाँ स्वर्ग में बहुत से पुजारी है पर वकील आप पहले हैं इसलिए।"
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