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गुदगुदी Hindi Jokes

यह एक जग प्रसिद्ध सच है कि सभी बहुओं को अपनी सास से परेशानी रहती है।

ऐसे ही एक दिन सभी बहुएं इकट्ठी हुई और उन्होंने फैसला किया कि, वे सब अपनी सास से माफ़ी मांगेगी और कहेंगी, उन्होंने जो भी किया उनसे वो गलती से हुआ।

एक हफ्ते बाद सभी बहुओं ने पिकनिक जाने का कार्यक्रम बनाया, जिसमें पूरे परिवार के साथ अपनी अपनी सास को भी ले गयी।

सारी सास एक ही बस में थी जो सबसे आगे चली थी रास्ते में उनकी बस का एक्सिडेंट हो गया।

और सभी सास मर गयी, सारी बहुएं जोर-जोर से बिलख-बिलख कर रो रही थी।

पर एक बहु को शायद कुछ ज्यादा ही दुःख हुआ वो जमीन पर हाथ पटक पटक कर रो रही थी। सभी उसे सांत्वना देकर कह रहे थे, कम से कम तुम्हारी सास बिना किसी चिंता के मरी है। तुम्हारा उससे कोई झगड़ा नहीं था पर वो अभी भी जोर-जोर से चिल्ला रही थी।

जब वो बार-बार बोलने पर चुप नहीं हो रही थी तो एक औरत ने उसे पूछा, "तुम इतना क्यों चिल्ला रही हो, क्या तुम्हारी सास ज्यादा खास थी?"

उस औरत ने अपने आप को थोड़ा संभाला और सिसकते हुए कहा, "नहीं, उनसे बस छूट गयी है।"
एक बार एक आदमी डॉक्टर के पास गया और बोला;

आदमी: डॉक्टर साहब, मैं बहुत परेशान हूँ, जब भी मैं बिस्तर पर लेटता हूँ तो मुझे लगता है की बिस्तर के नीचे कोई है। जब मैं बिस्तर के नीचे देखने जाता हूँ तो लगता है ऊपर कोई है। नीचे, ऊपर, नीचे, ऊपर यही करता रहता हूँ, सो नहीं पता। मेरा अच्छा सा इलाज़ कीजिये नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा।

डॉक्टर: तुम्हारा इलाज़ लगभग दो साल तक चलेगा, तुम्हे हफ्ते में तीन बार आना पड़ेगा, और अगर तुमने मेरे बताये अनुसार इलाज़ किया तो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे।

आदमी: डॉक्टर साहब, पर आपकी फीस कितनी होगी?

डॉक्टर: 100 रुपये एक बार आने के और 200 रुपये एक महीने की दवाई के।

आदमी गरीब था, इसीलिए फिर आने का कह कर चला गया।

6 महीने बाद वही आदमी डॉक्टर को सड़क पर घूमते हुए मिला तो डॉक्टर ने उस से पूछा," क्यों भाई, तुम अपना इलाज़ करवाने क्यों नहीं आये?"

आदमी: "डॉक्टर साहब जिस इलाज के आप 300 रुपये मांग रहे थे, वह मेरे पडोसी ने सिर्फ 20 रूपए में कर दिया"।

डॉक्टर ने हैरानी से पूछा: अच्छा वो कैसे?

आदमी: "जी वो एक बढई है, और उसने मेरे पलंग के चारो पाँव सिर्फ 5 रुपये प्रति पाँव के हिसाब से काट दिए"।
एक बार एक किसान का घोडा बीमार हो गया। उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया बोला, "आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक नहीं तो हमें इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।"

यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था।

अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े के पास गया और बोला, "उठो दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।"

दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया।

बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला, "दोस्त तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मैं तुम्हारी मदद करता हूँ। चलो उठो"

तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, "मुझे अफ़सोस है कि हमें इसे मारना पड़ेगा क्योंकि कोई भी सुधार नज़र नहीं आ रहा।"

जब वो वहाँ से गए तो बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, "देखो दोस्त, तुम्हारे लिए अब करो या मरो वाली स्थिति बन गयी है। अगर तुम आज भी नहीं उठे तो कल तुम मर जाओगे। इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे। थोड़ा सा और, तुम कर सकते हो। शाबाश, अब भाग कर देखो, तेज़ और तेज़।"

इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोडा भाग रहा है। वो ख़ुशी से झूम उठा और सब घर वालों को इकट्ठा कर के चिल्लाने लगा, "चमत्कार हो गया। मेरा घोडा ठीक हो गया। हमें जश्न मनाना चाहिए। आज बकरे का गोश्त खायेंगे।"

शिक्षा: मैनेजमेंट को भी कभी पता नहीं चलता कि कौन सा कर्मचारी कितना योग्य है।
एक शख़्स ने दो निकाह किये थे और वो अपनी दोनों बीवीयों से बहुत प्यार करता था। दोनों ही के साथ बड़ा इंसाफ़ का मामला भी रखता था।

तक़दीर का फ़ैसला देखिए कि दोनों ही बीवियों का एक ही वक़्त में इंतक़ाल हो गया।

शौहर ने इंसाफ़ के तक़ाज़े से ये चाहा कि दोनों को एक ही वक़्त और एक ही साथ ग़ुस्ल दिया जाए (नहलाया जाये)।

इसलिए उसने ग़ुस्ल देने वालियाँ दो औरतें बुलवाईं ताकि एक ही वक़्त में दोनों को एक साथ ग़ुस्ल दिया जाए।

फिर दफ़न के लिये घर से एक ही वक़्त में एक साथ निकालने का तय किया।

इत्तेफ़ाक़ से उस घर में एक ही दरवाज़ा था। शौहर ने क्योंकि एक ही वक़्त में दोनों बीवियों का जनाज़ा निकालने का तय किया हुआ था इसलिए आनन-फानन में तुरन्त ही एक और नया दरवाज़ा बनवाने का फ़ैसला किया।

दरवाज़ा बनाने वाला बुलाया गया, और दूसरा दरवाज़ा बनवा कर एक ही वक़्त में दोनों के जनाजो को घर से निकाला।

दफ़न कर के जब घर सब वापस आये तो सबने उसके बीवीयों के साथ रहन-सहन की तारीफ की और उसने अपने इंसाफ़ पर अल्लाह का शुक्र अदा किया कि उसने मुझे सही इंसाफ़ करने की तौफ़ीक़ दी।

रात में एक बीवी को शौहर ने अचानक ख़्वाब में देखा। वो बड़ी ही ग़मज़दा आवाज़ में कह रही थी, "मैं आप से नाराज़ हूँ। अल्लाह आप को माफ़ नहीं करेगा।"

शौहर ने पूछा, "लेकिन क्यों? ख़ुदा की बंदी आखिर क्या हुआ?"

इस पर उसकी बीवी ने जवाब दिया, "आपने अपनी दूसरी बीवी को नये दरवाज़े से निकाला और मुझे पुराने दरवाज़े से।"
एक प्रसिद्ध हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने पेशेंट को तुरंत बायपास सर्जरी करवाने की सलाह दी। पेशेंट नर्वस हो गया किंतु तुरंत तैयारी में लग गया।

ऐसे वक्त थोडा संयम रखकर सेकंड ओपीनियन लेना ज्यादा ठीक होता।

ऑपरेशन के पहले वाले सारे टेस्ट हो जाने के बाद डॉक्टर की टीम ने बजट बताया, जो कि पेशेंट को बहुत ज्यादा लगा।

लेकिन जान है तो जहान है यह सोचकर वह फॉर्म भरने लगा। व्यवसाय के कॉलम के आगे उसने C.B.I. लिख दिया।

अचानक हॉस्पिटल का वातावरण ही बदल गया। डॉक्टरों की दूसरी टीम चेकअप करने आयी। रीचेकींग हुआ और टीम ने घोषित किया कि ऑपरेशन की जरूरत नहीं है। मेडिसिन खाते रहिये ब्लाकेज निकल जायेगा।
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पेशंट Central Bank of India का कर्मचारी था।
एक बार एक व्यक्ति मरकर नर्क में पहुँचा, तो वहाँ उसने देखा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी देश के नर्क में जाने की छूट है। उसने सोचा चलो अमेरिका वासियों के नर्क में जाकर देखें। जब वह वहाँ पहुँचा तो द्वार पर पहरेदार से उसने पूछा, "क्यों भाई अमेरिकी नर्क में क्या-क्या होता है?

पहरेदार बोला, "कुछ खास नहीं, सबसे पहले आपको एक इलेक्ट्रिक कुर्सी पर एक घंटा बिठाकर करंट दिया जायेगा, फ़िर एक कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे तक लिटाया जायेगा, उसके बाद एक दैत्य आकर आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोडे मारेगा।

यह सुनकर वह व्यक्ति बहुत घबराया और उसने रूस के नर्क की ओर रुख किया, और वहाँ के पहरेदार से भी वही पूछा। रूस के पहरेदार ने भी लगभग वही वाकया सुनाया जो वह अमेरिका के नर्क में सुनकर आया था। फ़िर वह व्यक्ति एक-एक करके सभी देशों के नर्कों के दरवाजे पर जाकर आया, सभी जगह उसे भयानक किस्से सुनने को मिले। अन्त में जब वह एक जगह पहुँचा, देखा तो दरवाजे पर लिखा था "भारतीय नर्क" और उस दरवाजे के बाहर उस नर्क में जाने के लिये लम्बी लाईन लगी हुई थी, लोग भारतीय नर्क में जाने को उतावले हो रहे थे।

उसने सोचा कि जरूर यहाँ सजा कम मिलती होगी। तत्काल उसने पहरेदार से पूछा कि सजा क्या है?

पहरेदार ने कहा, "कुछ खास नहीं...सबसे पहले आपको एक इलेक्ट्रिक कुर्सी पर एक घंटा बिठाकर करंट दिया जायेगा, फ़िर एक कीलों के बिस्तर पर आपको एक घंटे तक लिटाया जायेगा, उसके बाद एक दैत्य आकर आपकी जख्मी पीठ पर पचास कोडे मारेगा।

चकराये हुए व्यक्ति ने उससे पूछा, "यही सब तो बाकी देशों के नर्क में भी हो रहा है, फ़िर यहाँ इतनी भीड क्यों है?"

पहरेदार: इलेक्ट्रिक कुर्सी तो वही है, लेकिन बिजली नहीं है, कीलों वाले बिस्तर में से कीलें कोई निकाल ले गया है, और कोडे़ मारने वाला दैत्य सरकारी कर्मचारी है, आता है, दस्तखत करता है और चाय-नाश्ता करने चला जाता है और कभी गलती से जल्दी वापस आ भी गया तो एक-दो कोडे़ मारता है और पचास लिख देता है।
पत्नी को किसी किटी पार्टी में जाना था तो उसने अपने पति से पूछा, "सुनो जी मैं कौन सी साड़ी पहनूं? ये नीली वाली या लाल वाली?

पति: नीली वाली पहन लो।

पत्नी: लेकिन नीली वाली तो मैंने परसो भी पहनी थी।

पति: अच्छा तो फिर लाल ही पहन लो।

पत्नी: अच्छा अब यह बताओ, लाल साड़ी के साथ सैंडल कौन से अच्छे लगेंगे? ये फूल वाले या प्लेन?

पति: प्लेन वाले।

पत्नी: अरे मैं पार्टी में जा रही हूँ, किसी कथा में नहीं। थोड़ी तड़क -भड़क तो दिखनी चाहिए ना।

पति: ताे ठीक है फूल वाले पहन लो।

पत्नी: अच्छा बिंदी कौन सी अच्छी लगेगी? ओवल या ये बड़ी या ये छोटी सी?

पति: मेरे ख्याल से तो ओवल ठीक रहेगी।

पत्नी: तुम्हें फैशन का जरा भी आइडिया नहीं है। मैंने जो साड़ी पहनी है ना, उसके साथ तो ये छोटी ही अच्छी लगेगी।

पति: तो ठीक है, छोटी बिंदी ही लगा लो।

पत्नी: अच्छा, पर्स कौन सा जमेगा? यह क्लच या बड़ा हैंडबैग।

पति: क्लच ले लो।

पत्नी: अाजकल तो बड़े हैंडबैग का फैशन है।

पति: ताे अरे बाबा, वही ले जाओ, मुझे क्या करना है। बस पार्टी को एंजॉय करना।

पत्नी जब पार्टी से लौटकर आई तो बड़े गुस्से में थी।

पति: अरे क्या हुआ?

पत्नी: तुम एक भी काम ढंग से नहीं कर सकते क्या?

पति: क्यों मैंने क्या गलत कर दिया?

पत्नी: पार्टी में सब मेरा मजाक उड़ा रहे थे कि कैसी साड़ी पहनकर आ गई, कैसी बिंदी लगाई है, पर्स और सैंडल पर भी कमेंट पास कर रहे थे।

पति: तो इसमें मेरा क्या दोष है?

पत्नी: सब मैंने तुमसे ही पूछ कर किया था न? ढंग से नहीं बता सकते थे क्या? इससे तो अच्छा था कि मैं खुद ही डिसाइड कर लेती।
एक बार एक पजामा पहने हुए हिन्दुस्तानी से एक अंग्रेज ने पूछा, "आप का यह देशी पैंट (पजामा) कितने दिन चल जाता है?

हिन्दुस्तानी ने जवाब दिया, "कुछ ख़ास नहीं, मै इसे एक साल पहनता हूँ। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट कर राजू के साइज़ का बना देती है। फिर राजू इसे एक साल पहनता है। उसके बाद श्रीमति जी इसको काट छांट कर तकियों के कवर बना लेती है। फिर एक साल बाद उन कवर का झाडू पोछे में इस्तेमाल करते हैं।"

अंग्रेज बोला, "फिर फेंक देते होंगे?"

हिन्दुस्तानी ने फिर कहा, "नहीं-नहीं इसके बाद 6 महीने तक मै इस से अपने जूते साफ़ करता हूँ और अगले 6 महीने तक बाइक का साइलेंसर चमकाता हूँ। बाद में मारदडी की हाथ से बनायीं जाने वाली गेंद में काम लेते हैं और अंत में कोयले की सिगडी (चूल्हा) सुलगाने के काम में लेते हैं और सिगड़ी (चुल्हे) की राख बर्तन मांजने के काम में लेते हैं।"

इतना सुनते ही अंग्रेज रफू चक्कर हो गया।

किसी भी चीज का सम्पूर्ण इस्तेमाल कोई हम हिन्दुस्तानियों से सीखे। हमें हिंदुस्तानी होने पर गर्व है।
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